Home/Festivals

नवदुर्गा के नाम: नवरात्रि 2026 में नौ देवियों के स्वरूप, तिथि और पूजा विधि

नवदुर्गा के नौ स्वरूप, माँ दुर्गा बाघ पर विराजमान

अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026 · पढ़ने का समय: लगभग 9 मिनट · लेखक: रोहन वर्मा

नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित हैं, और इन्हीं को एक साथ नवदुर्गा कहा जाता है। बहुत से भक्त हर दिन की देवी का नाम, उनका मंत्र और भोग जानना चाहते हैं। यह गाइड नवदुर्गा के नाम, उनके स्वरूप, वाहन, बीज मंत्र और नवरात्रि 2026 की तिथियों को एक ही जगह सरल हिंदी में समेटती है।

चाहे आप पहली बार घर पर घटस्थापना कर रहे हों या हर साल व्रत रखते हों, यहाँ आपको दिनवार पूजा का क्रम, घर की सरल पूजा विधि और व्रत के नियम मिलेंगे। रंगों की विस्तृत सूची के लिए हमारी नवरात्रि के 9 रंग गाइड भी देख सकते हैं।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • नवरात्रि 2026 (शारदीय) 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक है, और विजयादशमी 20 अक्टूबर को है।
  • नौ दुर्गा के नाम क्रम में हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री।
  • हर स्वरूप का अपना वाहन, भोग और बीज मंत्र है, जो नीचे तालिका और विस्तृत खंड में दिया गया है।
  • घटस्थापना पहले दिन शुभ मुहूर्त में की जाती है; घर पर पूजा के लिए किसी पंडित का होना अनिवार्य नहीं।

इस गाइड में क्या-क्या है

नवदुर्गा के नाम और नवरात्रि 2026 तिथि

नीचे एक नज़र में नवदुर्गा के नाम, हर दिन की तिथि, वाहन और भोग दिए गए हैं। यह तालिका पूरे नवरात्रि की योजना बनाने में मदद करती है।

दिन तिथि (2026) स्वरूप भोग
पहला दिन (प्रतिपदा) रविवार, 11 अक्टूबर 2026 माँ शैलपुत्री देसी घी
दूसरा दिन (द्वितीया) सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 माँ ब्रह्मचारिणी शक्कर
तीसरा दिन (तृतीया) मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 माँ चंद्रघंटा दूध या खीर
चौथा दिन (चतुर्थी) बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 माँ कूष्मांडा मालपुआ
पाँचवाँ दिन (पंचमी) गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 माँ स्कंदमाता केला
छठा दिन (षष्ठी) शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 माँ कात्यायनी शहद
सातवाँ दिन (सप्तमी) शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 माँ कालरात्रि गुड़
आठवाँ दिन (अष्टमी) रविवार, 18 अक्टूबर 2026 माँ महागौरी नारियल
नौवाँ दिन (नवमी) सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 माँ सिद्धिदात्री हलवा, चना और पूरी

नवदुर्गा के नौ रूप: शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नौ देवियों का चित्रण

अब हर स्वरूप को विस्तार से समझने से पहले, यह जानना ज़रूरी है कि माँ के नौ रूप हैं ही क्यों।

↑ ऊपर जाएँ

नवदुर्गा की कथा: नौ रूप ही क्यों?

नवदुर्गा माँ आदिशक्ति के नौ रूप हैं, जो सृष्टि के अलग-अलग गुणों और शक्तियों को दर्शाते हैं। पुराणों के अनुसार महिषासुर नामक असुर के अत्याचार बढ़ने पर सभी देवताओं की सम्मिलित शक्ति से देवी दुर्गा प्रकट हुईं।

देवी ने नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया और अंततः उसका वध कर धर्म की स्थापना की। इसी कारण माँ को महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है, और यही नौ दिन नवरात्रि के रूप में मनाए जाते हैं।

हर दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की पूजा होती है, जो एक विशेष भाव का प्रतीक है, जैसे संयम, साहस, ममता और सिद्धि। नौ रूपों की यह यात्रा साधक को धीरे-धीरे भीतर की ओर ले जाती है। देवी के विस्तृत स्वरूपों को अंग्रेज़ी में समझने के लिए हमारी 9 Forms of Durga (Navadurga) गाइड भी उपयोगी है।

कई परंपराओं में नौ रातों को तीन-तीन के तीन चरणों में देखा जाता है। पहले तीन दिन शक्ति और बुराई के नाश के लिए माँ दुर्गा को, बीच के तीन दिन समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी को, और अंतिम तीन दिन ज्ञान के लिए माँ सरस्वती को समर्पित माने जाते हैं। यही क्रम भीतर की सफाई, फिर समृद्धि, और अंत में विवेक की यात्रा का प्रतीक है।

↑ ऊपर जाएँ

शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से सोमवार, 19 अक्टूबर तक है। दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर और महानवमी 19 अक्टूबर को है, जबकि विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

घटस्थापना यानी कलश स्थापना पहले दिन, प्रतिपदा को की जाती है। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना का शुभ समय प्रातः लगभग 6:20 बजे से 10:18 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त लगभग दोपहर 11:46 से 12:32 बजे तक भी शुभ माना गया है।

अष्टमी और नवमी नवरात्रि के सबसे महत्वपूर्ण दिन माने जाते हैं। इन्हीं दिनों संधि पूजा, कन्या पूजन और हवन किए जाते हैं, जिनसे व्रत को पूर्णता मिलती है। कई घरों में अष्टमी या नवमी पर ही नौ कन्याओं को भोजन कराकर व्रत खोला जाता है।

मुहूर्त का समय शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से एक बार पुष्टि ज़रूर कर लें। पूरे साल के व्रत-त्योहार की तिथियों के लिए हमारा हिंदू व्रत त्योहार कैलेंडर 2026 देखें।

↑ ऊपर जाएँ

नवदुर्गा के नौ स्वरूप विस्तार से

यहाँ हर देवी का स्वरूप, वाहन, भोग और बीज मंत्र क्रम से दिया गया है। यही 9 देवी के नाम और उनके मंत्र नवरात्रि की दैनिक पूजा का आधार बनते हैं।

1. माँ शैलपुत्री

पहला दिन (प्रतिपदा) · रविवार, 11 अक्टूबर 2026। पर्वतराज हिमालय की पुत्री। वृषभ (नंदी बैल) पर सवार, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल।

  • भोग: देसी घी
  • बीज मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
  • वरदान: आरोग्य और स्थिरता का वरदान।

2. माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरा दिन (द्वितीया) · सोमवार, 12 अक्टूबर 2026। तप और संयम की देवी। एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल, नंगे पैर तपस्या करती हुई।

  • भोग: शक्कर
  • बीज मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
  • वरदान: संयम, धैर्य और दीर्घायु।

3. माँ चंद्रघंटा

तीसरा दिन (तृतीया) · मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026। मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र। सिंह पर सवार, दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र लिए वीर रूप।

  • भोग: दूध या खीर
  • बीज मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः
  • वरदान: साहस और भय से मुक्ति।

4. माँ कूष्मांडा

चौथा दिन (चतुर्थी) · बुधवार, 14 अक्टूबर 2026। अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड को रचने वाली आदिशक्ति। आठ भुजाओं वाली, सिंह पर विराजमान।

  • भोग: मालपुआ
  • बीज मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
  • वरदान: आरोग्य, यश और बल।

5. माँ स्कंदमाता

पाँचवाँ दिन (पंचमी) · गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता। गोद में बालक स्कंद, सिंह पर सवार, कमल धारण किए।

  • भोग: केला
  • बीज मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
  • वरदान: संतान सुख और ममता।

6. माँ कात्यायनी

छठा दिन (षष्ठी) · शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026। ऋषि कात्यायन के यहाँ पुत्री रूप में अवतरित योद्धा देवी। सिंह पर सवार, तेजस्वी रूप।

  • भोग: शहद
  • बीज मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
  • वरदान: विवाह में आ रही बाधाओं का नाश।

7. माँ कालरात्रि

सातवाँ दिन (सप्तमी) · शनिवार, 17 अक्टूबर 2026। श्याम वर्ण, भय का नाश करने वाली उग्र रूपा। गर्दभ (गधे) पर सवार, शुभंकरी भी कहलाती हैं।

  • भोग: गुड़
  • बीज मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
  • वरदान: नकारात्मक शक्तियों और भय से रक्षा।

8. माँ महागौरी

आठवाँ दिन (अष्टमी) · रविवार, 18 अक्टूबर 2026। अत्यंत गौर वर्ण, श्वेत वस्त्र धारण किए शांत रूप। वृषभ पर सवार, त्रिशूल और डमरू लिए।

  • भोग: नारियल
  • बीज मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
  • वरदान: पापों का नाश और मनोकामना पूर्ति।

9. माँ सिद्धिदात्री

नौवाँ दिन (नवमी) · सोमवार, 19 अक्टूबर 2026। सभी सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी। कमल पर विराजमान, सिंह वाहन, चार भुजाओं वाली।

  • भोग: हलवा, चना और पूरी
  • बीज मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
  • वरदान: सिद्धि, ज्ञान और मोक्ष।

↑ ऊपर जाएँ

घर पर नवदुर्गा की पूजा विधि

घर पर नवदुर्गा की पूजा विधि सरल है और इसके लिए किसी पंडित का होना ज़रूरी नहीं। नीचे दिया क्रम रोज़ की पूजा के लिए पर्याप्त है।

  1. सुबह स्नान करके पूजा स्थान और मूर्ति को स्वच्छ करें।
  2. पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना और जौ बोएँ।
  3. माँ को अक्षत, फूल, कुमकुम और उस दिन के अनुसार भोग अर्पित करें।
  4. घी का दीपक और धूप जलाकर उस दिन की देवी का बीज मंत्र जपें।
  5. दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
  6. अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन और हवन के साथ व्रत का समापन करें।

दिन-प्रतिदिन के विस्तृत क्रम के लिए हमारी नवरात्रि पूजा विधि: नौ रातों की गाइड पढ़ें।

↑ ऊपर जाएँ

नवरात्रि व्रत के नियम

व्रत का उद्देश्य शरीर और मन दोनों की शुद्धि है। नियम व्यक्ति और परिवार की परंपरा पर निर्भर करते हैं, पर कुछ सामान्य बातें इस प्रकार हैं।

  • अन्न, प्याज़, लहसुन और मांसाहार से परहेज़ किया जाता है।
  • फलाहार में कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, आलू और सेंधा नमक लिया जाता है।
  • दिन में एक बार भोजन या केवल फलाहार, यह श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार तय करें।
  • गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग और रोगी बिना कठोर उपवास के भी पूजा कर सकते हैं।

सही स्वरूप और भोग के साथ किया गया छोटा-सा व्रत भी उतना ही फलदायी माना जाता है। अगली बात, घर के मंदिर के लिए माँ की सही मूर्ति चुनने की।

↑ ऊपर जाएँ

घर के लिए दुर्गा माँ की मूर्ति कैसे चुनें

नवरात्रि में बहुत से परिवार घर के मंदिर के लिए माँ दुर्गा की स्थायी मूर्ति लाते हैं। मूर्ति चुनते समय स्वरूप, आकार और सामग्री, तीनों पर ध्यान दें।

सिंह या बाघ पर विराजमान महिषासुरमर्दिनी स्वरूप घर के मंदिर के लिए सबसे प्रचलित है। आकार ऐसा हो जो आपके मंदिर में सहज बैठ जाए, न बहुत बड़ा, न बहुत छोटा।

बाघ पर विराजमान माँ दुर्गा की सिल्वर-प्लेटेड मूर्ति, घर के मंदिर के लिए

सामग्री के मामले में ईमानदारी ज़रूरी है। ठोस चाँदी की मूर्ति बहुत महँगी होती है, इसलिए कई परिवार शुद्ध चाँदी की परत (सिल्वर प्लेटिंग) वाली मूर्ति चुनते हैं, जो चाँदी जैसी चमक ठोस चाँदी की लागत के बिना देती है।

उदाहरण के लिए, दुर्गा माता की एक हस्त-परिष्कृत बाघ पर विराजमान सिल्वर-प्लेटेड मूर्ति रोज़ की पूजा और नवरात्रि, दोनों के लिए उपयुक्त रहती है। मूर्ति की दिशा और स्थापना पर मार्गदर्शन के लिए हमारी घर के लिए दुर्गा मूर्ति गाइड देखें।

↑ ऊपर जाएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवदुर्गा के नौ नाम कौन से हैं?

नवदुर्गा के नौ नाम हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। नवरात्रि के हर दिन इनमें से एक स्वरूप की पूजा होती है।

नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?

शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर से सोमवार, 19 अक्टूबर तक है। विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।

नवरात्रि के किस दिन कौन-सी देवी की पूजा होती है?

पहले दिन शैलपुत्री, फिर क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा होती है।

नवदुर्गा को किस दिन क्या भोग लगाएँ?

परंपरा के अनुसार क्रमशः देसी घी, शक्कर, दूध, मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल और नवमी पर हलवा-चना-पूरी का भोग लगाया जाता है।

क्या घर पर बिना पंडित के नवदुर्गा की पूजा की जा सकती है?

हाँ। स्वच्छता, श्रद्धा, दीपक, उस दिन का भोग और बीज मंत्र के साथ घर पर सरलता से पूजा की जा सकती है। पंडित का होना अनिवार्य नहीं है।

↑ ऊपर जाएँ

और पढ़ें

संबंधित गाइड:

संग्रह देखें: सिल्वर-प्लेटेड मूर्ति संग्रह · त्योहार उपहार